What is E-invoice in GST in Hindi 2021 ?

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ई-चालान  जनरेशन के समान नहीं हैGST द्वार। ई-चालान एक आम पोर्टल पर पहले से ही उत्पन्न मानक चालान जमा कर रहा है। जीएसटी पोर्टल पर ई-वे बिल द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर माल के परिवहन की सुविधा है। हालांकि, ई-चालान व्यक्तियों की कुछ श्रेणियों के लिए लागू है। यह चालान विवरण के एक बार इनपुट के साथ बहुउद्देश्यीय रिपोर्टिंग का स्वचालन है।.

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वित्त वर्ष 2020-2021 के अंत तक ई-GST E-INVOICEइनवॉइसिंग (e-invoicing) ने सफलतापूर्वक अपने 6 महीने पूरे कर लिए हैं। वर्तमान में, 100 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाले 75,000 से अधिक जीएसटीआईएन (25000 से अधिक इकाइयां/पैन से संबंधित) इनवॉइस रजिस्ट्रेशन पोर्टल (IRP) पर इनवॉइस रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

 

 

जीएसटी नेटवर्क (GSTN) के वाइस प्रेसिडेंट रवि किरन इदरा का कहना है कि हर महीने (जनवरी 2021 से) लगभग 7.3 करोड़ IRN (इनवॉइस रेफरेंस नंबर) जेनरेट हो रहे हैं। अब, 1 अप्रैल 2021 से, रु. 50 से 100 करोड़ के टर्नओवर वाले कारोबार भी ई-इनवॉइसिंग (e-invoicing) का लाभ ले सकेंगे। इस संदर्भ में, यह देखना महत्वपूर्ण है कि ई-इनवॉइसिंग बिजनेस इको-सिस्टम (e-invoicing Business Eco System) को पूरी तरह से कैसे बदलने जा रहा है।

what is E-Invoice in GST:-

‘ई-इनवॉइसिंग’ की विशेषताओं में मुख्य रूप से अधिसूचित पोर्टल पर इनवॉइस विवरण की रिपोर्टिंग और रेफरेंस नंबर जेनरेट करना शामिल है। इसके अलावा, यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि इनवॉइस के लिए एक समान मानक पर काम किया गया हो और इसे ‘INV-01’ के रूप में अधिसूचित किया गया है। यह किसी भी प्रकार की वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति के लिए एक विशिष्ट कमर्शल इनवॉइस का मिश्रण है। यह मानक यूनिवर्सल बिजनेस लैंग्वेज (यूबीएल) पर आधारित है, जो भारतीय व्यवसाय की कार्यप्रणाली के लिहाज़ से काफी अनुकूल है। यह इनवॉइस के ‘मशीन-रीडेबिलिटी’ और व्यवसायों के बीच अत्यावश्यक ‘इंटर-ऑपरेबिलिटी’ के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। यानी एक से दूसरे अकाउंटिंग/ ईआरपी सिस्टम में डिजिटल रूप से इनवॉइस के सीधे ब्रॉडकास्ट की अनुमति देकर। इसे प्राप्तकर्ता या रेसिपीएन्ट बिजनेस को जीएसटी सिस्टम से सीधे हस्ताक्षरित इनवॉइस JSON डाउनलोड करने के लिए सक्षम करके प्राप्त किया जा सकता है।

ई-चालान कब लागू किया गया था?.

इसे जनवरी 2020 में लागू किया गया था। करदाताओं का वार्षिक कारोबार रु। 500 करोड़ रुपये 7 जनवरी, 2020 से ई-चालान उत्पन्न कर सकते हैं। रुपये से कम का कारोबार। 500 करोड़, लेकिन रुपये से अधिक। 1 फरवरी 2020 से 100 करोड़ रुपये ई-चालान उत्पन्न कर सकते हैं। कारोबार में एकल पैन पैन के तहत जीएसटीआईएन का कारोबार शामिल होगा।.

ई-चालान कैसे बनाएं?

चरण 1- चालान जनरेट करना

  • नीचे उल्लेखित माल की आपूर्ति के लिए एक चालान में अनिवार्य क्षेत्र हैं:
  • चालान प्रकार
  • चालान प्रकार के लिए कोड
  • बीजक संख्या
  • चालान की तारीख
  • आपूर्तिकर्ता का विवरण, नाम सहित, आपूर्तिकर्ता का GSTIN, आपूर्तिकर्ता पता (स्थान, पिन कोड, राज्य सहित)
  • खरीदार का विवरण जैसे नाम, GSTIN, राज्य कोड, पता, स्थान, पिन कोड, आदाता का नाम, खाता संख्या, भुगतान मोड और IFSC कोड
  • प्रेषण का विवरण
  • इनवॉइस आइटम भेजा जा रहा है
  • कुल कर राशि
  • भुगतान राशि
  • कर योजना (क्या जीएसटी, उत्पाद शुल्क, वैट)
  • शिपिंग के तहत नाम, जीएसटीआईएन, पता, पिन कोड, राज्य, आपूर्ति प्रकार, लेनदेन मोड (चाहे नियमित हो, ‘बिल टू ‘या or शिप टू’) जैसे विवरण
  • माल का विवरण नहीं, मात्रा, दर, मूल्यांकन मूल्य, GST दर, CGST / SGST / IGST की राशि, कुल चालान मूल्य, बैच / नाम

चरण 2- अद्वितीय आईआरएन की पीढ़ी

इस खंड में, आपूर्तिकर्ता supplier उत्पन्न कर सकता हैहैश’आपूर्तिकर्ता के GSTIN, आपूर्तिकर्ता के चालान नंबर और वित्तीय वर्ष के आधार पर।

चरण 3- JSON अपलोड करना

अंतिम चालान के JSON को अपलोड करने के लिए निम्नलिखित मोड का उपयोग करें:

सीधे चालान पंजीकरण पोर्टल (आईआरपी) पर

Through GST Suvidha Provider (GSP)

तृतीय-पक्ष एप्लिकेशन (API सहित)

चरण 4- हैश जनरेशन / वेलिडेशन

यदि आपने बिना हैश के चालान अपलोड किया है, तो आपको इसे जनरेट करना होगा। यहाँ IRP द्वारा उत्पन्न हैश IRN बन जाएगा। जब आपूर्तिकर्ता हैश अपलोड करता है, तो एक डी-डुप्लीकेशन चेक किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए आईआरएन को मान्य करके किया जाता है कि यह अद्वितीय है।

सत्यापन के बाद, आईआरएन को केंद्रीय रजिस्ट्री में संग्रहीत किया जाता है। आईआरपी एक क्यूआर कोड बनाता है और डिजिटल रूप से चालान पर हस्ताक्षर करता है। यह अब आपूर्तिकर्ता को उपलब्ध होगा।.

 

डेटा एंट्री का एरर खत्मimage

ई-इनवॉइस का पेपरलेस होना डेटा एंट्री एरर को खत्म करने, रीकन्सिलीऐशन के मुद्दों को कम करने, लेन-देन वालों के बीच विवादों में कमी, पेमेंट साइकिल में तेजी, कागज की खपत में पर्याप्त कमी, प्रॉसेसिंग की लागत में कमी, बेहतर आंतरिक नियंत्रण और ऐसी तमाम सुविधाओं के कारण व्यवसायों की दक्षता को बढ़ाने में सहायक होगा। यही नहीं, ये नेटवर्क न केवल इनवॉइस के आदान-प्रदान का समर्थन कर सकते हैं, बल्कि अन्य डॉक्यूमेंट जैसे पर्चेज ऑर्डर और पेमेंट की प्रक्रिया में भी सहायक होंगे। इस प्रकार, ई-इनवॉइसिंग बिजनेस के एक दूसरे के बीच इनवॉइस भेजने और प्राप्त करने के तरीके में क्रांति लाने वाला है।

कई फायदे हैं ई इनवॉयसिंग के

इस लिहाज़ से देखा जाए तो, ई- इनवॉइसिंग के कई फायदे हैं। कर अनुपालन या टैक्स कंपलायन्स व्यवसाय प्रक्रिया का हिस्सा बन रहा है, जीएसटी रिटर्न की प्री-पोपुलेशन, ई-वे बिल का ऑटो-जेनरेशन (जहां आवश्यक हो), फ्रॉड में कमी आदि ऐसे कई सकारात्मक नतीजे हैं हैं जो ई- इनवॉइसिंग के कारण संभव हो सके हैं। हाल ही में, सरकार ने भी संकेत दिया कि ई- इनवॉइसिंग जल्द ही ई-वे बिल सिस्टम की जगह लेगा और जीएसटी रिटर्न फाइल करने के मौजूदा तरीकों को बदल देगा। हालांकि, टैक्स कंपलायन्स की दृष्टिकोण से ये कुछ तात्कालिक लाभ हैं, लेकिन पूरे बिजनेस इको-सिस्टम को ई-इनवॉइसिंग के कई दूरगामी लाभ मिलेंगे।

कारोबारियों को आसानी से मिलेगा कर्ज

कर्ज के दृष्टिकोण से भी देखें तो, बैंक और वित्तीय संस्थान (एफआई) कर्ज चाहने वाले व्यवसायों के फाइनेंशियल हेल्थ और कंपलायन्स प्रोफाइल की जांच करना पसंद करते हैं। शीघ्रता से कर-प्रस्तावों का निपटारा करने के लिए, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) की विशेषज्ञ समिति ने नोट किया कि बैंकों की प्रासंगिक सरोगेट डेटा तक पहुंच होनी चाहिए। बैंक, एनबीएफसी और अन्य फिनटेक प्लेयर्स विभिन्न स्रोतों से वित्तीय जानकारी के संग्रह और प्रसंस्करण को कारगर बनाने के लिए नवीन डिजिटल तकनीकों को अपना रहे हैं। जीएसटी नेटवर्क (GSTN) की परिकल्पना करदाताओं के डेटा को साझा करने के लिए ऐसे फाइनेंशियल इन्फॉर्मेशन प्रोवाइडर्स में से एक के रूप की गई है।

बैंकों के साथ रियल टाइम पर डेटा होगा शेयर

देश में बैंक और एफआई धीरे-धीरे पारंपरिक परिसंपत्ति-आधारित / रेटिंग-आधारित उधार से नकदी प्रवाह-आधारित उधार की ओर बढ़ रहे हैं। एमएसएमई के लिए यह बहुत फायदेमंद ट्रेंड है। ट्रेड रिसीवेबल को लिक्विड फंड में परिवर्तित करने के लिए MSMEs की क्षमता को प्रभावित करने वाला एक बड़ा कारक ‘स्लो पेइंग’ इनवॉइस हैं। एकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क के रूप में, ई-इनवॉइसिंग से बैंकों और एफआई के साथ रियल टाइम बेसिस इनवॉइस डेटा शेयर करना संभव होगा। सरकारी पोर्टल से डिजिटली हस्ताक्षरित इनवॉइस सप्लायर द्वारा जारी किए गए डॉक्यूमेंट के लिए एकल स्रोत के रूप में कार्य कर सकता है। पहले से फाइनेंस किए गए इनवॉइस को फ्लैग करना भी संभव होगा जिससे आपूर्तिकर्ता या सप्लायर द्वारा उसी इनवॉइस को किसी दूसरे फाइनेंसर को जमा करने की संभावना से बचा जा सकेगा।

अन्य प्लेटफार्मों के साथ एकीकरण

अन्य प्लेटफार्मों के साथ एकीकरण भी ई-इनवॉइसिंग विशेषता रही है। आरबीआई द्वारा ट्रेड रिसीवेबल्स ई-डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) की स्थापना सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में की गई थी ताकि MSMEs को उनके इनवॉइस का ‘ट्रेड’ करने और प्रतिस्पर्धी दरों पर फाइनेंस तक पहुंच प्राप्त हो सके। अब, सप्लायर्स को TReDS पोर्टल्स पर ऐसे इनवॉइस विवरण दर्ज करने होंगे। एक बार जब ई-इनवॉइसिंग को मध्यम और छोटे व्यवसायों तक बढ़ाया जाएगा, रिपोर्ट किए गए ई-इनवॉइस का विवरण TReDS डिजिटल प्लेटफार्मों द्वारा सुरक्षित रूप से प्राप्त किया जा सकता है, जिससे उन पोर्टल्स पर इनवॉइस डेटा के री-एंट्री की आवश्यकता को कम किया जा सकता है।

आने वाले समय में होगा फ़ायदा

ई-इनवॉइसिंग (e-invoicing) में जिस तरह से इसमें परिवर्तन हो रहे हैं और नवाचारों यानी इनोवेशन (Innovation) की गति बढ़ रही है, खासकर फिनटेक डोमेन में, ई-इनवॉइस आने वाले समय में और ज्यादा लाभप्रद साबित हो सकता है। जिसे देखते हुए यह आसानी से कहा जा सकता है कि आने वाले समय में ई-इनवॉइसिंग बिजनेस इको-सिस्टम के लिए गेम चेंजर बनने जा रहा है।

 

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